Wednesday, January 13, 2010

के. जे. राव - सफल प्रशासक और राजनीति में सकारात्मक भूमिका के निर्वाहक


के जे राव ! एक प्रशासक जो किसी परिचय के मोहताज नहीं रहे है। टी.एन.शेषन, जे.एम. लिंग्दोह के पश्चात चुनाव सुधार कार्यक्रम में यदि किसी सफल प्रशासक का नाम जुँबा पर चढ़ता है तो वह है केजे राव। वर्तमान में के.जे. राव ‘फाउन्डेशन फार एडवांस मैनेजमेंट ऑफ इलेक्शंन’ (फेम) में कार्य कर रहे। फेम के तहत एनएसयूआई तथा यूथकांग्रेस के आंतरिक संगठन चुनाव हो रहे है। फेम के दृढ निर्णयों के फलस्वरुप ही संगठनात्मक चुनाव में हिंसा तथा बल के जरीये कोई व्यक्ति संगठन का पद प्राप्त नहीं कर सकता है। मुझे याद है कि एनएसयूआई राष्ट्रीय कार्यालय में ऑल इंडिया कांग्रेस पार्टी की सचिव तथा एनएसयूआई प्रभारी मीनाक्षी नटराजन, राष्ट्रीय अध्यक्ष हाईबी ईडन के साथ पहली बार के.जे राव साहब को देखा। अपने दृढ़ और ठोस निर्णयों के लिए जाने वाले राव साहब नें संगठन के आंतरिक चुनाव में दोषी पाए गए 10 कार्यकर्ताओं संगठनात्मक पदों के लिए अयोग्य घोषित कर दिया। दिल्ली एनएसयूआई के लिए यह एक बहुत बड़ा झटका था लेकिन संगठन में पारदर्शिता, निर्णय लेने की क्षमता के कारण ही केजे राव साहब ने इसे जरुरी समझा।
चुनावों में अपनी बेहतरीन भूमिका के लिए के.जे. राव हमेशा याद किए जाएगें। गौरतलब है कि बिहार के सन् 2005 के चुनाव के लिए जनता उन्हें आज भी याद करती है। विषम परिस्थितियों, हिंसात्मक माहौल, बंदूक के साये में चुनाव की गूँज बिहार में गुंजती रही। कट्टा-पिस्टल के चुनावी माहौल में केजे राव ने हिंसामुक्त तथा निष्पक्ष तरीकें से चुनाव संपन्न किए। बिहार की जनता ने देखा की शांतिपूर्ण और चुस्त-दुरुस्त शासन व्यवस्था से बेहतर हालात पैदा हो सकते है। शांतिपूर्ण माहौल कामय करने तथा हिंसा बल पर रोकथाम के लिए के.जे.राव सदा याद रखे जाएगे।
अपने प्रशासनिक अनुभवों के बलबुते देश की राजनीति में सकारात्मक भूमिका का निर्वाह करने की चाहत के साथ जे.ए. लिंग्दोह की संस्था ‘फाउन्डेशन फार एडवांस मैनेजमेंट ऑफ इलेक्शंन’ (फेम) के साथ जुड़े। स्वयंसेवी संगठन फेम के सहयोग के तहत राहुल गाँधीजी ने संगठन चुनाव कराने की पेशकश रखी। इस पेशकश को स्वीकार करने से पूर्व राव साहब ने राहुल जी के सामने आपराधिक तत्वों को संगठन के ढाँचे में आने पूर्ण प्रतिपंथ का होना चाहिए तथा चुनाव की पारदर्शिता बाबत् फेम का निर्णय अंतिम माना जाए। उपरोक्त दोनों शर्तों को राहुल जी ने तुरन्त मान लिया। राहुल गाँधी की साफगोई तथा कार्य करने में पूर्ण स्वायतत्ता प्राप्त होने पर अवकाश ग्रहण के बाद चुनाव सुधार की आंकाक्षाओं को मूर्तरुप देने का एक ओर अवसर राव साहब को प्राप्त हुआ। जिसे उन्होंने एक चुनौती के रुप में बखूबी स्वीकार किया। राव साहब ने उतराखंड में एनएसयूआई तथा पंजाब में यूथ कांग्रेस के चुनाव कराकर पायलट प्रोजेक्ट को सफल अंजाम दिया। इसी कड़ी के तहत जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़, दिल्ली, केरल आदि प्रान्तों में चुनाव हुए तथा आगामी कड़ी में मध्यप्रदेश, आन्ध्रप्रदेश, गोवा आदि राज्यों में चुनाव हो रहे है। फेम ने अपने राहुल जी की संगठन की रीति-नीति बाबत नई सोच को सफल रुप से अंजाम देने के लिए आंतरिक लोकतंत्र के तहत एक टीम प्रदान की। संगठन चुनाव में गड़बड़ी फैलाने वाले तत्वों पर पंजाब, छत्तीसगढ़ तथा दिल्ली आदि राज्यों में कड़ी कार्यवाई करने से एक भी बार नहीं झिझके। जिसके कारण फेम की विश्वसनीयता स्थापित हुई तथा शरारती तत्वों के हौसलें पस्त हुए। संगठन में उपरोक्त प्रक्रिया के तहत साल 2010 के अंत तक पूरे देश में आतंरिक लोकतंत्र के तहत कांग्रेस के युवा संगठनों का नया ढाँचा तैय्यार होगा। फेम तथा के.जे. राव साहब की काबलियत को इस ब्लॉग के माध्यम से बहुत-बहुत साधुवाद!!!!!

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